madhyapardesh STATE STATES

होमगार्ड के 14 हजार जवानों को वेतन के लाले 27 सौ अतिरिक्त पदों पर नियुक्ति से बढ़ी दिक्कत

भोपाल। सुप्रीम कोर्ट से यूपी के 70 हजार और उत्तराखंड के 10 हजार होमगार्ड्स को भले ही राहत मिल गई हो, मगर मध्यप्रदेश में अब भी हाल बेहाल है। मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने होमगार्ड्स को कॉन्स्टेबल के न्यूनतम वेतन के बराबर प्रतिदिन का पेमेंट (अनुपातिक भत्ता) देने का आदेश दिया है। लेकिन प्रदेश के चौदह हजार होमगार्ड के जवानों को पिछले दो माह से वेतन नहीं मिला है। इससे उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। वेतन न मिलने से होमगार्ड के जवान अपने बच्चों का स्कूलों में दाखिला भी नहीं करा पाए हैं। वित्त विभाग ने यह कहकर अतिरिक्त बजट देने से इंकार कर दिया कि होमगार्ड के जवानों से रोटेशन के आधार पर दस माह ही ड्यूटी कराई जाए। दो माह उन्हें ड्यूटी पर न लिया जाए।
सिंहस्थ के लिए स्वीकृत किए गए थे 2700 पद
जानकारी के अनुसार प्रदेश में होमगार्ड सैनिकों के लगाग चौदह हजार पद स्वीकृत हैं। इसके लिए राज्य सरकार द्वारा हर वर्ष बजट में वेतन का प्रावधान किया जाता है। यह व्यवस्था सिंहस्थ के लिए राज्य सरकार ने होमगार्ड के 2700 पद स्वीकृत किए थे। गृह विभाग द्वारा पद स्वीकृत किए जाने के कारण भर्ती भी हो गई, लेकिन वित्त विभाग ने वेतन की राशि स्वीकृत नहीं की। भाजपा सरकार में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा थी, इसलिए वित्त विभाग ने होमगार्ड के सैनिकों के वेतन पर कोई रोक नहीं लगाई, लेकिन सरकार बदलते ही वित्त विभाग ने बिना स्वीकृति के कार्य कर रहे अधिकारियों और कर्मचारियों के वेतन पर रोक लगा दी। इससे होमगार्ड को पिछले दो माह से वेतन मिलना बंद हो गया है। वेतन न मिलने की स्थिति होमगार्ड के 2700 अतिरिक्त पदों के कारण बनी है। वर्तमान सरकार इन पदों को नियमित करने के पक्ष में नहीं है।
अवकाश को भी तरस रहे जवान
होमगार्ड सैनिकों से काम तो पुलिस के आरक्षक की तरह लिया जाता है लेकिन उन्हें वेतन और अन्य सुविधाएं नहीं मिलती हैं। महीने में उन्हें मात्र ढाई दिन का अवकाश मिलता है। सरकार का यह निर्णय कितना हास्यास्पद है कि एक तरफ होमगार्ड सेवा को बंद करने की बात कही जा रही है तो वहीं दूसरी ओर अधिकारियों की भर्ती की जा रही है।
गलत आदेश से पैदा हुई समस्या
राज्य सरकार ने होमगार्ड के 550 जवानों को एसडीआएफ से लेकर सभी जिलों में पदस्थ करने के आदेश जारी किए थे लेकिन इस आदेश में एक कमी है जिसके कारण एसडीआरएफ के जवानों को प्रतिनियुक्ति पर नहीं लिया जा सका। यही नहीं एसडीआरएफ के कर्मचारियों को भी वेतन नहीं मिल रहा है। एडीजी एसडीआरएफ दिनेश चंद सागर का कहना है कि एक्ट में संशोधन करने का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा गया है जो जल्द ही इसका समाधान हो जाएगा।

Featured