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केरल भाजपा के लिए दिल्ली दूर

पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में केरल भाजपा के लिए अभी भी अबूझ पहेली
पिछले सात-आठ सालों में भाजपा ने देश के विभिन्न राज्यों में अपना जो विस्तार किया है वह अपने आप में अनूठा है। खुद भाजपा के नेता दबी जुबान से इस बात को स्वीकार करते हैं कि मात्र हिंदी क्षेत्र की इस राजनीतिक पार्टी का इस तरह व्यापक विस्तार होगा यह उनकी कल्पना से भी परे था। लोकसभा में पहले 282 और फिर 302 सीटें हासिल करना किसी सपने के ही समान है। अब कहा जा सकता है कि भाजपा पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है। खासकर पूर्वोत्तर राज्यों में इसका फैलाव उल्लेखनीय है। लेकिन अभी भी दक्षिण का केरल राज्य ऐसा है जहां कमल खिलना शेष है। इन दिनों हो रहे पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में केरल भाजपा के लिए अभी भी अबूझ पहेली बना हुआ है। यह कहना गलत नहीं होगा कि केरल भाजपा के लिए अभी भी जीत दूर की कोड़ी है। हालांकि वह अपना वोट प्रतिशत व सीटों की संख्या में कुछ इजाफा कर सकती है। अभी भाजपा का विधानसभा में महज एक विधायक है। यह एकमात्र सीट भाजपा ने पिछली बार नेमम की जीती थी, जबकि उसके सबसे बुजुर्ग ओ राजगोपाल विजयी हुए थे। (ईएमएस)

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