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बॉम्बे हाईकोर्ट का केंद्र से सवालः रेमडेसिविर बांटने का क्या है आधार 

देश के 40 फीसदी कोरोना केस महाराष्ट्र में तो उसे उतने ही इंजेक्शन मिलने का हक 
नागपुर, 19 अप्रैल। महाराष्ट्र में रेमडेसिविर की कमी पर बॉम्बे हाईकोर्ट ने नोटिस लिया है। कोर्ट की नागपुर बेंच ने केंद्र सरकार से सवाल किया है कि राज्यों को रेमडेसिविर इंजेक्शन किस आधार पर बांटा जा रहा है? कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र में देश के 40 फीसदी कोरोना मरीज हैं तो उन्हें रेमडेसिविर भी उसी हिसाब से दिए जाने चाहिए। हाईकोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को भी फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि जिलों को मनमाने तरीके से रेमडेसिविर का बंटवारा किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि महाराष्ट्र सरकार ने 13 अप्रैल और 18 अप्रैल को नागपुर में रेमडेसिविर की एक भी वायल (शीशी) क्यों नहीं भेजा गया?
30 फीसदी रेमडेसिविर इंजेक्शन राज्य को मिलना चाहिए
इस केस में एमिकस शामिल किया गया है। ये कानून के जानकार होते हैं, जिनका केस से सीधा संबंध नहीं होता, लेकिन वे कोर्ट की मदद करते हैं। एमिकस ने कोर्ट से कहा कि एफडीए कालाबाजारी की जांच कर सकता है। महाराष्ट्र में संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए 30 फीसदी रेमडेसिविर इंजेक्शन राज्य को मिलना चाहिए।
रेमडेसिविर का सही बंटवारा नहीं हो रहा
कोर्ट ने कहा कि कोविड-19 से हालात सबसे बुरे दौर में पहुंच गए हैं। लाइफ सेविंग ड्रग की कमी है। ऑक्सीजन की पर्याप्त सप्लाई नहीं हो पा रही है। मेडिकल और पैरामेडिकल स्टाफ भी कम है। नागपुर में वायरस का स्ट्रॉन्ग वैरिएंट देखा जा रहा है। ठाणे जिले में 2,448 कोरोना बेड पर 5,328 रेमडेसिविर वायल दिए गए हैं। नागपुर में 8,232 बेड के मुकाबले सिर्फ 3,326 रेमडेसिविर वायल दिए गए हैं। यह तर्क समझ से परे है। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि राज्य की समिति रेमेडेसिविर का सही बंटवारा नहीं कर पा रही है।
प्रदेश में हर तीन मिनट में एक मरीज दम तोड़ रहा
महाराष्ट्र में हर घंटे करीब 2,859 लोग संक्रमित हो रहे हैं और हर तीन मिनट पर एक मरीज दम तोड़ रहा है। मृतकों की कुल संख्या भी 60 हजार के पार पहुंच चुकी है। पिछले 24 घंटों में यहां 503 लोगों की मौत हुई है। दुनिया के 209 देशों से ज्यादा मौतें सिर्फ महाराष्ट्र में हुई हैं।

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